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Socio - Religious Reform Movements in the 19th and 20th CE India
पडताळलेले उत्तर (Verified)
MPSC सराव प्रश्न:
खालील जोड्या जुळवा +-------------------------+----------------------+ | संस्था | संस्थापक | +-------------------------+----------------------+ | 1. प्रार्थना समाज | A. राजा राम मोहन रॉय | | 2. सत्यशोधक समाज | B.आत्माराम पांडुरंग | | 3. रेहनुमाई माझदासन सभा | C. ज्योतिबा फुले | | 4. ब्राम्हो समाज | D. नौरोजी फर्दोनजी | +-------------------------+----------------------+
Match the following +------------------------------+-----------------------+ | Organization | Founder | +------------------------------+-----------------------+ | 1. Prarthana Samaj | A. Raja Ram Mohan Roy | | 2. Satyashodhak Samaj | B. Atmaram Pandurang | | 3. Rehnumai Mazdayasan Sabha | C. Jyotibha Phule | | 4. Brahmo Samaj | D. Naoroji Furdonji | +------------------------------+-----------------------+
पर्याय (Options):
A
1(C), 2(B), 3(A), 4(D)
B
अचूक उत्तर (Official Answer)
1(B), 2(C), 3(D), 4(A)
C
1(C), 2(B), 3(D), 4(A)
D
1(B), 2(C), 3(A), 4(D)
सविस्तर स्पष्टीकरण (Detailed Explanation):
अचूक उत्तर: पर्याय (2)
योग्य उत्तर 1(B), 2(C), 3(D), 4(A) हे आहे.
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| संस्था | संस्थापक | वर्ष | उद्देश्य |
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| प्रार्थना समाज | आत्माराम पांडुरंग | 31 मार्च 1867 बॉम्बे येथे | सामाजिक-धार्मिक सुधारणांसाठी समाजाचे नेतृत्व करण्यासाठी. |
| सत्यशोधक समाज | ज्योतिबा फुले | 1873 | समाजामधील सत्य शोधणाऱ्यांसाठी, वंचित वर्गाच्या हक्कांसाठी, जातीव्यवस्थेचा निषेध करण्यासाठी आणि तर्कशुद्ध विचारसरणी पसरविण्यासाठी. |
| रेहनुमाई माझदासन सभा | नौरोजी फर्दोनजी | 1851 | पारशी लोकांच्या सामाजिक स्थितीचे पुनर्जन्म आणि झोरोस्टेरियन धर्माला त्याच्या मूळ शुद्धतेकडे परत आणणे. |
| ब्राम्हो समाज | राजा राम मोहन रॉय | 1828 | त्यात मूर्तीपूजा आणि अर्थहीन संस्कार आणि विधींचा त्याग करण्यात आला. सर्वात मोठी कामगिरी म्हणजे 1829 साली सती निर्मूलन. |
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